समय व लक्ष्य की परख ……!

      दोस्तों आज मै एक ऐसा कंटेंट शेयर कर रहा हूँ | जो महान लेखक और पूर्व सी. बी. आई. निदेशक जोगिन्दर सिंह जी की फेमस बुक POSITIVE THINKING से लिया है | मै श्री सिंह जी का तहेदिल से आभार वक्त करता हूँ कि उन्होंने अपने अमूल्य विचारो को कागज पर उतारा और हमें पढने का मौका दिया |
              
     अगर हम जीवन में जरुरत से ज्यादा पाना चाहते है | तो हमें अपने समय के बारे में थोडा सजग और सावधान होना होगा | हमें यह भी पता लगाना होगा कि जो काम हम कर रहे हैं | क्या उससे हमारे जीवन का मूल्य बढता है | या हमारी उर्जा नष्ट  होती है ? काम करते समय हम जो गतिबिधिया अपनाते है , वे भी हमारे लिए काफी मायने रखती है | हम सावधान रहें कि हम अपना खली समय कैसे बिताते है , सामाजिक या व्यावसायिक कार्यक्रमों में कैसी बातें करते है ? या कैसी मीटिंगों में भाग लेते है ?
            हमें अपनी तकनीको के प्रवाह को लगातार चलाये रखने के तरीके निकालने होंगे ताकि अनुत्पादक गतिबिधियो , नकारात्मक बातचीत व बाधायों पर रोक लग सके | पूरी सजगता से अपने समय का मूल्यांकन करके हम अपने अनुत्पादक गतिबिधियो पर काबू पा सकते है | इसके बदले में हम ऐसे काम कर सकते हैं, जिससे हमें आनंद मिलता है या निजी तथा व्यावसायिक रूप से विकास होता है |
           सबसे खास बात तो यह है कि हम दुसरो को अपने समय पर शासन करने दें और अपनी जीवन दिशा स्वयं तय करें | बस इसी तरह हम निजी संतुष्टि व उपलव्धियों को बड़ी उचाईयो तक पहुच सकते है | मिसाल के तौर पर , मै पिछले सप्ताह एक पाँचसितारा होटल में डिनर के लिए गया , इसकी मेजबानी एक निजी एयर लाइंस कर रही थी | पूरी पार्टी में केवल पूर्व होम सैकेट्री ही मेरे जानकार थे | वे भी मेरी जैसी अवस्था में थे | इसलिए हम दोनों साथ हो लिए और पार्टी में पैंतालिस मिनट तक साथ रहे | अनजाने चेहरों के बीच समय बिताना बड़ा मुश्किल हो जाता है | आपको चेहरे पर एक बनाबटी मुश्कान लानी पड़ती है जिनसे जावडे दुखने लगते है |
          पैतालीस मिनट बाद मैं माफ़ी मांग कर उठ गया और डिनर के लिए नहीं रुका | डिनर के लिए रुकने का मतलब था दो घंटे का लम्बा इंतजार | वास्तव में, मैं सबसे देर पहुंचा था और सबसे पहले वापिस जा रहा था | इस तरह मुझे रात  को सोने से  एक घंटा किताब पढने का अवसर मिल गया | मैं जो भी कहता हूँ या करना चाहता हूँ , उससे पहले अंदाज़ा लगा लेता हूँ कि क्या मैं अपने ऊर्जा , कार्यकुशलता व समय का बेहतर सदुपयोग कर सकता हूँ | यदि कोई काम इस पैमाने पर खरा नहीं उतरता तो मैं उसे नहीं करता या किसी दुसरे उपयोगी काम के साथ जोड़ देता हूँ | अपने व सस्ता के उद्देश्य पाने के लिए आवश्यक है कि आप कुछ खास कामो पर केन्द्रित रहें |
         आप जो भी करें ,आपके लक्ष्य की ओर ले जाने वाला होना चाहिए | मुझे मान लेना चाहिए कि पहले मैं ऐसे जाने -माने लोगों से मेल-जोल में काफी समय गवांता था | जीवन में मुझे उन लोगो से मिलने का अवसर तक नहीं मिला |
         अपनी मंजिल तक पहुचने के लिए आपको मंजिल ओर रास्ते का पता होना चहिये | आपकी नीतिया ऐसी होनी चाहिए जो आपको लक्ष्यों तक ले जाने में सहायक हों | यदि आपकी कोई टीम है तो उसके सदस्यों को भी अपनी उत्पादक गतिबिधियो में समय बिताना चाहिए | समय-समय पर अपनी कार्यछमता  को जाचते रहना चाहिए | कर्नाटक राज्य के बादर जिले के पुलिस चीफ या जिला सुपरिटेंडेंट के रूप में मैंने समय-समय पर अपने लिए काम करने वाले पुलिस अधिकारियो के ” अपराध नियंत्रण प्रदर्शन ” के अभ्यास के मूल्यांकन का नियम बना रखा था | सी.बी.आई. डायरेक्टर के रूप में भी मैंने अपना ये अभ्यास जारी रखा | इसी से मुझे पता चल जाता था कि संस्था में क्या चल रहा है |और प्रत्येक व्यक्ति अपने काम व जिम्मेदारी के प्रति सजग रहता है या नहीं ?
       आज जो भी पाने  की इच्छा रखते हो , निजी छमता की जाँच भी महत्व रखती है | उद्देश्य प्राप्ति के लिए आपको अपनी निजी दिनचर्या में फील गुड फैक्टर होना चाहिए यानि आपका हर दिन अच्छा व सार्थक होना चाहिए | समय-समय पर इसकी भी जाँच करते रहें |
        यदि अब भी आप अपनी इच्छा पूरी करने के लिए संघर्षरत है तो आपको अपने आपसे पूछना चाहिए कि क्या आपको अतिरिक्त जानकारी की जरुँत है , क्या आपके पास वांछित कौशल नहीं है या आपको अपनी समस्या को अलग नजरिये से देखना होगा ? संघर्ष से उबरें और रूकावटो की असली वजह पता लगायें ताकि आप भी आगे बढ सकें | जो भी लक्ष्य पाने के लिए जरुरी न हो , उससे छुटकारा पा लें , जो काम दुसरो ओ बांटे जा सकते है उन्हें कुशलतापूर्वक बाँट दें और उसके जिम्मेदारी से जुड़े रहें | केवल उन्ही बातों पर खुद को केन्द्रित करें जो केवल आप कर सकते है या जो आपके निजी या व्यावसायिक विकास में सहायक हों |
        गलत बातों पर समय बिताने का अर्थ होगा कि आप उतना ही समय सही बातों पर लगाये ताकि मनचाहे नतीजे पा सकें | याद रखने के लिए आप खोये हुए समय को दोबारा नहीं पा सकते | आपको अपने समय का पूरा इस्तेमाल करना सीखना होगा |
             कोई भी प्रत्येक क्षेत्र का विशेषज्ञ नहीं हो सकता | हर चीज में सिद्धहस्त होना कठिन है | इस तरह आप किसी भी कम में पूरा हुनर नहीं पा सकते | अपने समय का पूरा उपयोग करें | काम बाँटने की कला भी अच्छी नेत्रत्व  क्षमता व निजी क्षमता पर निर्भर करती है | काम सौपने के बाद उनपर नजर रखें , लेकिन हर समय की टोकाटाकी से दोनों पक्षों का ही समय नष्ट होता है |
        अपने काम में श्रेष्ठता पाने के लिए आपको वर्तमान पर ही केन्द्रित करना सीखना होगा | वर्तमान ही तो वास्तविकता है | यहीं आप पहचान सकते हैं | कि क्या आप अपने समय का पूरा उपयोग कर पा रहें है ? कल , परसों या अगले महीने क्या होगा , ऐसा विचार करने का अर्थ है , भविष्य की चिंता करना | याद रखें कि चिंता कभी आपका भला नहीं कर सकती , यह आपके तनाव की वजह बन जाती है |
         यह आपको वर्तमान से हटाकर धुंधले भविष्य की और ले जाती है | इस तरह न तो भविष्य हाथ आता है और न ही वर्तमान | चिंता से बचने का एकमात्र तरीका है , व्यस्त रहें | इस तरह चिंता के लिए समय ही नहीं मिलता | किसी भी क्षेत्र में योग्यता पाना चाहते हो तो आपको समय  पर काबू करके वर्तमान में जीना होगा | यह हम पर निर्भर करता है कि हम समय को कैसे बिताते है या कैसे निवेश करते है ?
       लेकिन आप करना क्या चाहते है , इसके बारे में स्पष्टत: पता न होने पर आप अपने लक्ष्यों व उपलक्ष्यो को भूल सकते हो | मैंने महसूस किया है कि जिन बातो को मै लिख नहीं पाता, वे या तो भूल जाता हूँ या नजरंदाज हो जाती है | मेरी पत्नी ने पिछले सप्ताह कहा कि वह एक नयी टेलीफोन डायरी शुरू करना चाहती है | मैंने कहा कि मै बाज़ार से लाकर दे दूंगा | मैंने उसे लिस्ट में यह सोचकर  शामिल नहीं किया कि मुझे याद रहेगा | मैंने एक स्टेशनरी की दुकान से एक फैक्स मशीन के लिए फैक्स रोल खरीदा लेकिन मुझे डायरी खरीदना याद नहीं रहा | व्यावसायिक योजना की तरह रोजमर्रा  के कामो की लिस्ट बनाना भी मायने रखता है | यह समय की बर्वादी नहीं है | इससे समय बचता है | जब आप इन बातो को कागज पर लिख लेते है तो दुसरे जरुरी कामो के लिए दिमाग में काफी जगह बच जाती है | इस तरह आप जो भी करना चाहे  करना आसान हो जाती है | फिर चाहे वो निजी काम हो या व्यावसायिक |
          मैंने ये भी देखा है कि यदि आप कुछ करने का फैसला कर लें तो काम करने के सहयक लोग, तरीके व साधन अपने आप ही सामने आ जाते है | और आपक्को लक्ष्य तक पहुचने में आसानी  हो जाती है | यह जादुई लगता है लेकिन सच है | मेरे आठ साल पुराने टेपरेकॉर्डर में कुछ खराबी आ गयी | मैं नया खरीदना चाहता था लेकिन मुझे भरोषा नहीं था कि  कुछ बेहतर मी पायेगा या नहीं ? मेरे पास एक व्यक्ति अपनी परेशानी लेकर आया | बातों ही बातों में उसने बताया कि वह एक टेप-ऑडियो कम्पनी में काम करता है | मैंने उससे कहा कि मुझे कैसे पाता चलेगा कि मै बढ़िया चीज खरीद रहा हूँ या नहीं ? वह मुझे के ऐसे डीलर के पास लेकर गया जिसने मुझे बढ़िया सैट दिया | अगर मैंने इस काम को अपनी लिस्ट में शामिल नहीं किया होता तो मै इसे भूल जाता और उस व्यक्ति से इस बारे में बात ही नहीं करता | इस तरह आप स्वयं से पूछ सकते है कि आपने आज कौन कौन से काम करने है | इससे यह भी पता चल जाता है कि आपने बदलती जरुरतो के हिसाब से क्या योजना बनायीं है ? यही नियम आपकी संस्थागत गतिबिधियो , वित्तीय गतिविधियों , लक्ष्यों , संभावित प्रतिभा , दैनिक व्यवसाय , निजी नीतियों व कार्यक्रमों पर भी लागू होता है |

अगर आपके पास कोई  INSPIRATIONAL स्टोरी हो तो मुझे सेंड करें मै उसे आपके नाम से पोस्ट करूँगा  | 

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