नजरिया ……..!

    दोस्तों नमस्कार आपका दोस्त एक बार फिर हाज़िर है आपके लिए एक नया ब्लॉग लेकर |  दोस्तों कहते है कि आप जैसा देखना  चाहते हो आपको वो चीज वैसी ही दिखाई देगी | इस चीज को  सिद्ध करने के लिए मुझे काफी कुछ करना पड़ा | मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे हो सकता है | अगर हम लड़के को लड़की देखना चाहूँ तो क्या दिखाई देगी | काफी बार कोशिश की लेकिन नहीं हुआ | आखिर मैंने ये मान लिया कि ऐसा नहीं होता है | जो चीज वास्तब में जो है  वही दिखेगी | दोस्तों मै ये समझ नहीं पा रहा था कि जब किसी ने ये बात कही है तो कुछ तो सोच समझ के कही होगी | अब एक बात साफ थी या तो कहने वाला पागल था या मै पागल हूँ | लेकिन मै अभी ये नहीं समझ नहीं पा रहा था कि किस तरह से देखने की बात करते है ये लोग | मैंने निर्णय लिया पहले इस वाक्य को समझना होगा उसके बाद ही कुछ हल निकलेगा | लेकिन मै फिर भी कुछ नहीं कर सका |  अगले दिन मै स्कूल गया तो मेरे क्लासटीचर ने मेरे एक दोस्त से पानी लाने को कहा | वो और मै दोनों पानी लेने गए | उसने मग  को आधा ही भरा मैंने कहा यार आधा क्यों भरा ? पूरा ही भर लेता | तब वो बोला कि यार तुझे दिखाई  नहीं देता | ये आधा ही तो खाली है | बाकी तो भरा है | मैंने फिर कहा कि आधा खाली नहीं ये तो आधा ही भरा है | उसने भी फिर वही शब्द दोहराए | यार आधा ही तो खाली है | उसके द्वारा कहे वो शब्द जब मेरे कानो से टकराए | अन्दर चल रही सारी उलझन समाप्त हो गयी | सरे द्वार एक झटके से खुल गए और मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल चुका था | नजरिये का मतलब मेरे समझ में आ चुका था | ये भी जान चुका था कि जो बात कही गयी है वो भी सही है |
                दोस्तों ये बात सही है कि जिस चीज को आप जैसा देखोगे वो आप को वैसी ही दिखाई देगी | मै उस जगह गलत था | अगर मै आम को बबूल और बबूल को आम देखूंगा तो ऐसा कभी नहीं होगा | लेकिन जब किसी गिलास को देखा जाये तो जरुर आपको दो नजरिये दिखाई देंगे | जैसे मुझे वो आधा भरा दिख रहा था | लेकिन मेरे दोस्त को वो आधा खाली | अब बात ये है कि हम दोनों में सही कौन  है वो या मैं | जब मै अपनी साइड से सोचता तो खुद को सही पता कि गिलास तो आधा ही भरा था | लेकिन क्या मेरा दोस्त गलत था ? जब ये सबाल आया तो लगा वो भी सही है गिलास आधा ही तो खाली है | अब सही कौन है और गलत कौन है ?
       हकीकत ये थी न तो वो गलत था | और न मैं | अगर बात थी तो वो सिर्फ नजरिये कि और ये बात यहाँ सिद्ध हो जाती है कि आप जिस को जैसा देखते हो वो चीज आपको वैसी ही दिखाई देगी |
        दोस्तों सभी के पास दो दिमाग होते है | एक सकारात्मक और नकारात्मक | दोनों अपना काम सही तरीके से और पूर्ण निष्ठां  से करते है | अब आपको सोचना है कि आप खुद को सकारात्मक रखना चाहते हो या नकारात्मक ?  आप जिस को काम पर लगायोगे वो अपना काम करना आरम्भ कर देता है | जैसे आपने सोचा कि मै ये काम कर सकता हूँ | तो आपके सामने सभी वो पहलू आयेंगे जो आपको ये दिखायेंगे  कि आप ये काम कैसे कर सकते हो ?  आपको अपनी ताकत का अहसास होगा और आप उस कार्य को करने के लिए प्रेरित होंगे | लेकिन अगर ये सोच लेते है कि ये कैसे कर सकते है तो आप कही नहीं कर सकते है |  यहाँ तक आप ये समझ चुके होंगे कि सब कुछ हमरे हाथ में है | मंजिल को पाना और गवाना भी हमारे हाथ में है | तो फिर आप कौन सा विकल्प चुनना चाहोगे ? ये किसी से पूछने  की जरुरत नहीं है | सभी का एक ही जबाब होगा कि -” मैं सिर्फ सफल होना चाहता हूँ | अपनी मंजिल तक पहुचना चाहता हूँ ” तो जब सभी का एक ही जबाब है फिर एक ही रास्ता पकड़ना होगा | सकारात्मक सोच का | फिर आप देख क्या रहे हो खुद के नजरिये को बदलो और सिर्फ भरे गिलास को ही देखो | और सोचलो जो आधे भरे गिलास को आधा खाली बताता  है वो गलत  है | अगर आप ऐसा करेंगे तो एक दिन आपकी निगेटिव थिंकिंग ख़त्म हो जाएगी और सिर्फ वही बचेगी जिसकी आपको जरुरत है | तो फिर देर किस बात की लग जयो अपने काम पर……………………..

  1. #1 by Rohit Bhardwaj on October 26, 2014 - 11:37 am

    MAN DO ANYTHING AND EVERYTHING

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